मसरूम गर्ल दिब्या रावत-
आज दिव्या जी सारे उत्तराखंड मे अपने सफलता के झंण्डे गाडे हुऐ हैं
मशरूम का इस तरह उत्तपादन कर उन्होने न सिर्फ रोजगार के मौके पैदा किये बल्कि कुछ नया करने की सीख भी हमारे युवाओं को उनसे मिली है
उत्तराखंड उचित मोसम होने की वजह से जादा उत्पादन की क्षमता रखने वाला प्रदेश है उत्पादन तो हो ही जाएगा लेकिन उसे स्टार्टप देना कोई आसान बात नही होती । दिव्या रावत जी ने ये कर दिखाया ओर आज वो अपने इस काम से प्रदेश की मशरूम लेडी के नाम से जानी जाती हैं।
Oysters Mushroom (ढिंगरी मशरूम ):- यह विश्व में उगाये जाने वाले मशरूमों में तीसरा प्रमुख मशरूम है तथा भारत में इसका दूसरा स्थान है। इस मशरूम को खाने से शरीर में ग्लूकोज सहन करने की क्षमता बढती है जिससे मधुमेह रोगियों के उपचार में अत्यन्त लाभकारी पाया गया है। जल में घुलनशील कार्बोहाइड्रेट की उपस्थिति के कारण इसमें कैंसर रोधी गुण पाये जाते है साथ ही उत्सर्जन तन्त्र सम्बन्धी रोगों एवं कोलेस्ट्राल को कम करने में भी सहायक है।
मशरूम के उत्पादन का पहला विचार -
नॉएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में पढ़नी वाली दिव्या के मन मे विचार आया तो एसा आया जो सबसे परे ओर अलग था उन्होने शहर के बजाय पहाड को चुना ओर देहरादून मथुरावाला में खुद के दम पर मशरूम उत्पादन में जुड गयी परिवार वाले भी उनके इस फैसले से अचम्बित थे । धीरे धीरे बात बनी ओर उत्पादन बडा गांव मे टूटे खण्डरो मे भी इसका उत्पादन अच्छा हो सकता है इसलिऐ उन्होने अपने साथ की लोगों को जोडा जो काम करना चाहते थे। दिव्या ने इग्नू से सोशल वर्क में मास्टर डिग्री प्राप्त की और कई एनजीओ में भी काम किया था इसलिए उन्हे अच्छे से पता था कि ये काम मे सिर्फ अपने लिऐ ना करके बल्कि इससे कइ लोगों को जोडा जाऐ।
आज दिव्या जी सारे उत्तराखंड मे अपने सफलता के झंण्डे गाडे हुऐ हैं
मशरूम का इस तरह उत्तपादन कर उन्होने न सिर्फ रोजगार के मौके पैदा किये बल्कि कुछ नया करने की सीख भी हमारे युवाओं को उनसे मिली है
उत्तराखंड उचित मोसम होने की वजह से जादा उत्पादन की क्षमता रखने वाला प्रदेश है उत्पादन तो हो ही जाएगा लेकिन उसे स्टार्टप देना कोई आसान बात नही होती । दिव्या रावत जी ने ये कर दिखाया ओर आज वो अपने इस काम से प्रदेश की मशरूम लेडी के नाम से जानी जाती हैं।
Oysters Mushroom (ढिंगरी मशरूम ):- यह विश्व में उगाये जाने वाले मशरूमों में तीसरा प्रमुख मशरूम है तथा भारत में इसका दूसरा स्थान है। इस मशरूम को खाने से शरीर में ग्लूकोज सहन करने की क्षमता बढती है जिससे मधुमेह रोगियों के उपचार में अत्यन्त लाभकारी पाया गया है। जल में घुलनशील कार्बोहाइड्रेट की उपस्थिति के कारण इसमें कैंसर रोधी गुण पाये जाते है साथ ही उत्सर्जन तन्त्र सम्बन्धी रोगों एवं कोलेस्ट्राल को कम करने में भी सहायक है।
मशरूम के उत्पादन का पहला विचार -
नॉएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में पढ़नी वाली दिव्या के मन मे विचार आया तो एसा आया जो सबसे परे ओर अलग था उन्होने शहर के बजाय पहाड को चुना ओर देहरादून मथुरावाला में खुद के दम पर मशरूम उत्पादन में जुड गयी परिवार वाले भी उनके इस फैसले से अचम्बित थे । धीरे धीरे बात बनी ओर उत्पादन बडा गांव मे टूटे खण्डरो मे भी इसका उत्पादन अच्छा हो सकता है इसलिऐ उन्होने अपने साथ की लोगों को जोडा जो काम करना चाहते थे। दिव्या ने इग्नू से सोशल वर्क में मास्टर डिग्री प्राप्त की और कई एनजीओ में भी काम किया था इसलिए उन्हे अच्छे से पता था कि ये काम मे सिर्फ अपने लिऐ ना करके बल्कि इससे कइ लोगों को जोडा जाऐ।
दिव्या की मशरूम कंपनी 'सौम्य फ़ूड' विदेशों तक मशरूम का एक्सपोर्ट कर करोड़ों का टर्नओवर कर रही है। दिव्या का कहना है कि ''मैं कोई असाधारण काम नही कर रही हूँ। मैं बस एक सामाजिक दायित्व को निभा रही हूँ मैं उत्तराखंड की निवासी हूँ। जब मैं यहां आयी तो पता चला कि जीविका और रोजगार यहाँ के सामाजिक मुददे हैं। इन मुददों के हल के लिए मैने यहाँ के लोगों और यहाँ की भूमि का अध्ययन किया और पाया कि कृषि क्षेत्र में अगर ठोस कदम उठाए जाये तो गाँव के लोगों को लाभ होगा। और हम जैसे युवाओं को रोजगार की तलाश में शहर नही जाना पड़ेगा। बस मेरे पास एक ही उपाय था कि मै यहाँ मशरूम खेती करूँ। मै इसमें खुद को एक उदाहरण के तौर पर पेश करना चाहती थी। और मैं एक् सामाजिक उद्यमी बन गयी। आज मै अपने सामाजिक दायित्व के रूप में मशरूम मिशन को आगे बढ़ाने में लगी हूँ। इस मैं मानवता के क्षेत्र में अपना करियर भी कह सकती हूँ'
दिव्या कहती हैं कि ''उत्तराखंड में मशरूम में मै ही अकेली इस काम को कर रही हूँ। यह मेरे लिए एक प्रकार से सकारत्मक भी है और नकारत्मक भी। जब मैने मशरूम उत्पादन करने की सोची तो मुझे कोई गाइड करने वाला नही था। मेरे लिए सब कुछ नया था। मैने इससे जुड़े लोगों को ढूंढा, कौन मुझे सही गाइड करेगा ? कौन मुझे सही जानकारी देगा। ऐसे लोगों को ढूंढना मेरे लिए बहुत बड़ा चैलेंज था। मै चाहती थी कि पहाड़ का हर आदमी मशरूम का उत्पादन कर रहा हो। ये मेरे लिए अभी भी बहुत बड़ा चैलेंज हैं। अभी तक मशरूम फैक्ट्री का प्रोडक्ट था।
अब वो चाहती हैं कि लोग इसका उत्पादन अपने घरों मे भी करें।
दिव्या रावत जी की इस कोशिश को लाखो सलाम । आप अपने मुकाम पर यूं ही बढते रहें ।



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